Sunday, 30 October 2011
परीक्षा का एक प्रश्न
Monday, 29 August 2011
कि हारी हुई सी ही सही, लड़ाइयाँ तो हैं!
Thursday, 20 January 2011
बर्तन गंगा नहाने जाते है,..
मिथिलेश आंटी हमारे पड़ोस मे रहती है। खूबसूरत दो बच्चों की मॉ,कुशल गृहणी और पेशे से अंग्रेजी की प्रवक्ता।लेकिन ४२ की उम्र मे एक बेटे को जन्म देने के बाद से ही हड्डियों की बीमारी हो गई जिसके चलते हाथो और पैरों की उंगलिया टेढ़ी हो गई। बावजूद इसके काम की चुस्ती फुर्ती मे कोई फर्क नही पड़ा। सर्दियों मे हालत कुछ खराब हो जाती थी।शरीर अकड़ जाता था,तब वो मेरे घर धूप सेकने आती थी। खूब बाते करती इधर उधर की,अंग्रेजी की,शेक्सपियर,मिल्टन की, न्यू मॉ़र्डन एज की और आखिर मे अपनी शादी की और आज भी गुलाबी हो जाती है।
बालकृष्ण जी शाम को कॉलेज से आते चाय पीकर घर के बाहर ही कॉफी हाउस सा मजमा लगा देते। खूब तर्क करते मोहल्ले भर को समझाते बतियाते और ज्ञान बांटते बांटते रात के ११ बजा देतें। आंटी परेशान अग्निहोत्री जी खा ले तब वह बर्तन धोए।ऐसा नही है कि बाई नही हैं। बाई है लेकिन वह सुबह के बर्तन धोती है। करते कराते बालकृष्ण जी सा़ढ़े ग्यारह तक खाने की मेज पर आते। उसके बाद आंटी सारे बर्तन साफ करके सोती। सर्दियों की रातों में १२ बजे बर्तन धोकर सोना वाकई बड़ी बात है एक ऐसी औरत के लिए जिसकी हड्डिया ठंड में ऐठ जाती है।
एक दिन सुबह आंटी अपने हाथों की मालिश कर रही थी। मैंने पूछ लिया जब बाई है तो आप क्यो परेशान होती है? कुछ सोचकर वह बोली शादी की पहली रात तुम्हारे अंकल ने मुझसे तीन बाते मानने के लिए कहीं। पहली-मेरे कामों मे कोई हस्तछेप मत करना। दूसरा- मेरे माता पिता की बात मानना और तीसरा रात में बर्तन जूठे मत छोड़ना।
तीसरे काम पर अचंभा हुआ कि यह कैसी अटपटी अपेछा मैने पूछा तब जवाब मिला कोई सवाल नही। फिर भी रहा ना गया मुझसे मैमे कई दफा पूछा तब झुंझलाकर बोले - बर्तन गंगा नहाने जाते है, पिता जी ने मॉ से यही कहा था और अब मैं तुमसे कह रहा हूं। मेरा दिमाग सन्न और मन सन्निपात में। यह क्या तर्क है बर्तन गंगा नहाने जाते है इसलिए इन्हे जूठा ना छोड़ा जाए। साफ करके ही रखों। लेकिन एक पल को लगा कि गंगा तो पतितपावनी है वह तो पापों को धो डालती है।
मेरा तो दिमाग झनझना गया कि इस कुतर्क के पीछे तर्क क्या दूं कि आखिर क्यों बर्तन आधी रात गंगा नहाने जाते है।पता लगे तो मुझे जरूर बताए।
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Friday, 9 July 2010
मधुमय अतीत .......

Wednesday, 28 April 2010
सब अपनई हयेन
Saturday, 20 March 2010
उच्चारण ...............
शिखा सिंह
अपनी भावनाओं ,विचारों और सूचना बताने के लिए हम भाषा का इस्तेमाल करते हैं। और भाषा गठन शब्दों से होता है। शब्द हमारी अभिव्यक्ति की इकाई होते हैं। हम शब्दों से ही वाक्य विन्यास होता है। वाक्य सूचना, विचार और भावनाओं को सम्प्रेषित करते हैं। यहां हम बोलकर और लिखकर सूचना सम्प्रेषण की बात कर रहे हैं। जब हम बोलकर अपने संदेश को प्रेषित करते हैं, तब शब्दों का वजन बढ जाता है। हमारा संदेश किसी को कितना प्रभावित करता है। प्रभावपूर्ण संदेश संप्रेषण हमारे उच्चारण पर निर्भर करता है। उच्चारण की एक गलती पूरी बात को बदल देती है।
हम सभी का उच्चारण या प्रननसियेशन हमारी पृष्ठभूमि निर्धारित करता है। हम किस समाज या किस प्रदेश से आ रहे हैं जैसे ऐसा माना जाता है उत्तर भारतीय लोगों की हिन्दी काफी अच्छी होती है। वहीं पश्चिम बंगाल के लोगों का हिन्दी में बंग्ला का पुट लिए होती है। यहां मेरी चर्चा का विषय हिन्दी भाषा नहीं है बल्कि उच्चारण है। यहां मैं उच्चारण को लेकर अपनी बात आप सबके सामने रखना चाहती हूं।
अक्सर ये देखने को मिलता है कि एक ही शब्द को लोग अलग- अलग तरह से उच्चारण बोलते हैं। अंग्रेजी भाषा में तो सबसे ज्यादा दिक्कत आती ेहै। विटामिन को वाइटामिन, एटिट्यूड , प्रोनाउनसिएशन ऐसे ढेरे शब्द है जिनको लेकर सही उच्चारण को लेकर क्या है। कोई नहीं जानता । उच्चापण की इसी समस्या के समाधान के लिए 2000 में इन्टरनेशनल फोनेटिक एसोसिएशन की स्थापना की गई। इसकी स्थापना का उद्देश्य यह है कि ईन्टरनेशनल भाषा का उच्चारण पूरे विश्व में एक जैसा हो। भारत, ब्रिटेन, इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया फ्रान्स हर जगह अंग्रेजी बोली जाती है। हर देश के लोग अपनी सुविधानुसार उच्चारण करते है। इसकी कई खामियाँ सामने आती है। शब्द का वास्तविक उच्चारण खो जाता है और सुविधा वाला उच्चारण हावी हो जाता है। पूरे विश्व में एक समान अंग्रेजी बोले जाने के लिए यह ऑर्गनाईजेशन फोनेटिक डिक्शनरी बना चुकी है। जिसमें शब्दों के अर्थ के साथ-साथ अलग अलग चिन्ह बनाए गए है ये चिन्ह उच्चारण के संकेत हैं।
^...अ cup /k^p/
Double /D^bal/
Monk /m^nk/
^...ae ऐ
Cat /kaet/
Stamp /staemp/
Dad /daed/
ये कुछ संकेत हैं जिनके माध्यम से एक समान उच्चारण किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। और अब पूरी दुनिया इस उच्चारण पर अमल कर रही है। कुछ शब्द एक समान ध्वनि के साथ बोले जाते हैं जिन्हें डिपथांग्स कहते हैं। इसका विवरण भी दिया गया है। भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है और कम्युनिकेशन के छात्रों से शुद्ध उच्चारण की आशा की जाती है।
हिन्दी भाषा में ऐसी कोई संस्था नहीं है जो सही उच्चारण की पैरवी करे। इसीलिए इसमें स,श,ष,र,ड,को लेकर गलतियां बड़े पैमाने पर मतभेद बना हुआ है। और स्वान्त़: सुखाय उच्चारण अधिकतर लोग करते हैं।
Wednesday, 10 March 2010
जो तुमने देखे,जो हमने देखे
बदलते तेवर ज़माने लाये
जो हमने तुमने थे साथ देखे
न हम कभी भी हुए तुम्हारे
न तुम भी थे हुए हमारे
बंधी थे तुमसे जिसके सहारे
थी मेरी सरहद मेरे किनारे
यहीं कहीं पे वो एक तुम थे,
यहीं कहीं पे वो एक हम थे
बता रहीं है बची ये सरहद
सुना रहे है बचे किनारे
न अब हो तुम ना तुम्हारी
बातें न अब हूँ में ना पुरानी यादें
बची हैं सरहद बचे किनारे
दिखा रहे है निशाँ हमारे
शिखा सिंह


